हनुमान जी के चमत्कारों से शायद ही कोई अछूता हो. इन्होंने अपने बल और बुद्धि से कई चमत्कार किए हैं. बजरंग बली की गाथा कई चमत्कारों से भरी हुई है, जिन्हें हर किसी ने सुना है
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी विशेषताओं के चलते प्रतलित हैं. कोई अपनी ऊंची प्रतिमा के लिए तो कोई अपने चमत्कारों के लिए जाना जाता है. ऐसा ही हनुमान जी का एक चमत्कारी मंदिर इटावा शहर में स्थापित है. ऐसा कहा जाता है कि ये एक मात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें बजरंगी बली लड्डू खाते हैं और दूध पीते हैं.
उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर बीहड़ में प्रताप नगर ग्राम रुरा में यमुना नदी के किनारे पिलुआ में बजरंगबली का एक मंदिर स्थिति है. इस मंदिर में भगवान की लेटी हुई प्रतिमा है. मंदिर हनुमान के चमत्कारों के चलते प्रचलित है. यहां लोग दूर दूर से भगवान के दर्शन के लिए आते हैं.
ये मंदिर बेहद चमत्कारी है. भक्तों की मानें तो यहां हनुमान जी लड्डू खाते हैं. साथ ही दूध भी पीते हैं. प्रतिमा के मुंह में हमेशा पानी भरा रहता है. लोगों का कहना है भगवान के मुख में कितना भी प्रसाद डाल दो वो अंदर समा जाता है.
मंदिर में जो प्रतिमा स्थापित है वो हनुमान जी के बाल स्वरूप की है. प्रतिमा को ध्यान से देखें तो इसका मुख खुला हुआ है और अंदर पानी दिखाई देता है. कहते हैं जैसे ही भक्त भगवान को भोग लगाते हैं वो सीधे उनके पेट में चला जाता है. कई बार पुरातत्व विभाग के शोधकर्ता ने इसके पीछे का राज जानने की कोशिश की, लेकिन वो हमेशा नाकाम साबित हुए.
महाभारत के एक प्रसंग को बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रतापनेर नगर के राजा हुकुमदेव सिंह को तुलसीदास ने इस मूर्ति के बारे में बताया था, तब इसे निकाला गया। राजा हुकुमदेव इस मूर्ति को अपने नगर ले जाना चाहते थे, लेकिन हनुमान जाने को तैयार नहीं थे। हनुमान जी ने राजा को स्वप्न कहा कि अगर मुझे यहां से ले जाना चाहते हो तो मेरा पेट भर दो। राजा अभिमान में आकर हनुमान जी को दूध पिलाने लगे, लेकिन पूरे नगर का दूध मंगवाकर भी वो उनका मुखारविंद भर नहीं पाए। तब रानी ने क्षमा मांगते हुए श्रद्धा से एक छोटे से लोटे में दूध भरकर हनुमान जी को पिलाया। जिनसे उनका मुखारविंद भरकर तृप्त हो गया।
पुजारी ने बताया कि पिलुआ वाले महावीर के नाम से इस मंदिर को जो प्रसिद्धी मिली उसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते। पिलुआ एक जंगली पेड़ होता है, जिसकी जड़ के नीचे हनुमान जी दबे हुए थे। राजा ने उन्हें निकलवाया था और वहां एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया था। तब से इनका नाम पिलुआ वाले महावीर पड़ गया। पिलुआ वाले महावीर की सबसे बड़ी रहस्यमयी बात उनका मुखारविंद है। इनके मुखारविंद में प्रसाद स्वरूप जो भी लड्डू डाला जाता है वो सीधा उनके अंदर जाता है। वर्षों से ये क्रम ऐसे ही चलता आ रहा है। किसी को नहीं पता आखिर यह जाता कहां है।
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